मैंने पूछा, “प्रभु, आप रात में क्या कह रहे थे”? मैंने सुना, “पुत्र, मैं तुम्हें प्रतिदिन यह समझने का महत्व सिखा रहा था कि तुम एक आत्मा हो। जितना अधिक तुम इस वास्तविकता को जानोगे, उतना ही अधिक सामर्थी तुम मुझमें चलोगे। जिस पल तुम यह समझना शुरू करोगे कि तुम अपने विचारों और समझ में कितने सीमित हो, तुम आत्मा से अधिक प्राप्त करोगे। तुम्हारी आत्मा, मेरी आत्मा के साथ, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी, सर्व-पर्याप्त है। लेकिन तुम्हे लगेगा कि इसका क्या लाभ है?…
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