मुझे समय-समय पर परमेश्वर के स्वर्गदूतों से न केवल मिलने का सौभाग्य मिला है, बल्कि मेरे रोज़मर्रा जीवन में उनकी उपस्थिति का अनुभव करने का भी। एक बार तो स्वर्गदूतों से ऐसा मुठभेड़ हुआ जिसने मुझे इतना डरा दिया की मुझे इस आमने – सामने को ख़त्म करने के लिए प्रभु से स्वयं कहना पड़ा। बाद में पछतावा भी हुआ (मैं अभी भी आश्चर्य में अपना सिर हिला रहा हूं)। अभी भी इस बात पर मुझे हँसी आती है! आप सभी के लिए मेरा आज का विषय इन मुठभेड़ों से और आगे जाने के लिए है, इन स्वर्गदूतों को जानने में सक्षम होने के लिए है, जिन्हें स्वर्गीय पिता ने भेजा है। उनका उद्देश्य क्या है और परमेश्वर ने उन्हें आपके जीवन में क्यों सौंपा है?
यह एक मुठभेड़ है जो मेरे साथ 2 फरवरी, 2019 को हुआ था। मैंने परमेश्वर से पूछा, “क्या मैं स्वर्गदूतों से मुठभेड़ कर पाऊंगा और उनसे बात कर सकूंगा? परमेश्वर ने कहा “हाँ, स्वर्गीय वस्तुओं पर अपना मन लगाओ और तुम उनका सामना कर पाओगे। स्वर्गदूत स्वर्ग का भाग हैं और मेरे साथ आपकी यात्रा का एक हिस्सा। वे आपकी यात्रा को पूरा करने और इस जीवन-यात्रा पर बने रहने में आपकी मदद करते हैं। यदि आप इस पर अपना हृदय और मन लगाते हैं, तो आप मेरे इन स्वर्गदूतों से मुठभेड़ कर पाएंगे”। याद रहे, स्वर्दूतों के क्षेत्र के बारे में जान चुका था और अपने जीवन में उनकी गतिविधियों और सहायता को लगातार अनुभव कर रहा था। पर मेरे मन में अभी भी संदेह था, लेकिन जब मैंने अपने सवाल पर परमेश्वर का उत्तर सुना तो मुझे शांति मिली। मेरा हृदय ज्यादा से ज्यादा सीखने के लिए खुला था। और मुझे कहना होगा, कि मैंने इसके बाद बहुत कुछ सीखना शुरू कर दिया। यह मुझे एक और अनुभव की भी याद दिलाता है जो मैंने 1 मार्च 2019 को किया था। मैं जाग रहा था, मैंने अपने कमरे में एक स्वर्गदूत को देखा। अब ठीक है, चलो, मैं इसे थोड़ा तोड़कर बताता हूँ । मैंने कैसे देखा? क्या मैंने उसे अपनी खुली आँखों से देखा? नहीं ! मैंने देखा कि मेरी बाईं आँख के पास प्रकाश की एक चमक थी, और फिर मेरे विचारों में, मुझे पता था कि कमरे में एक परमेश्वर का स्वर्गदूत था । यह तब हुआ जब मैं सीख रहा था कि स्वर्गदूतों के साथ कैसे जुड़ना है और जो कार्य परमेश्वर करना चाहता है उसके लिए स्वर्गदूतों के साथ सहयोग कैसे करना है। तब मैंने अपने मन में पूछा, “तुम कौन हो और यहाँ क्यों हो”? उन्होंने कहा, “तुम्हारी रखवाली और रक्षा करने के लिए। मुझे स्वर्गीय पिता द्वारा भेजा गया है ”। मैंने पूछा “तुम्हारा नाम क्या है ?”,। उसने उत्तर दिया “अल्बर्ट”,। क्या आपको पता है कि इसका क्या मतलब है? मैंने इसका मतलब देखा – महान और उज्ज्वल। वाह! परमेश्वर ने मेरी रखवाली और रक्षा करने के लिए एक महान और एक तेजस्वी भेजा है! और उसने आपके लिए भी यही किया है। भजनसहिंता 91 कहता है “क्योंकि वह अपने स्वर्गदूतों को तेरे निमित आज्ञा देगा , कि जहाँ कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें !” शुरू में, मैं स्वर्गदूतों के क्षेत्र से हुई मुठभेड़ से बहुत उत्साहित था । लेकिन बाद में एक छोटा सा बदलाव आया और मैंने सीखा की किस तरह से स्वर्गदूतों के साथ सहयोग किया जा सकता है क्योंकि उन्हें मेरे स्वर्गीय पिता ने भेजा था। मैं परमेश्वर के लिए बहुत धन्यवादी हूं कि उन्होंने मुझे मेरे जीवन में सौंपे गए अन्य स्वर्गदूतों के बारे में अधिक बताने और सिखाने की अनुमति दी। मैं आने वाले समय में अपनी पुस्तकों में आपसे बांटूंगा कि किस तरह से स्वर्गदूतों से हुई मुठभेड़ों में मैंने खुद को संयोजित किया। याद रखें, ये मुठभेड़ और क्षण कुछ के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए हैं। यीशु का पीछा करो! वही एकमात्र कुंजी है। वह कहता है कि यदि तुम अपने पूरे हृदय से मुझे खोजोगे तो मुझे पाओगे। परमेश्वर स्वयं को और अपनी भलाई को किसी भी रीति से प्रकट कर सकता है ,यीशु से मुठभेड़ की कुंजी हमारी दृढ़ता में है।
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