दुल्हन का दायरा – दैविक मुठभेड़ों का क्षेत्र

मैं काफी उत्तेजित हूँ कुछ ऐसा आपसे बाटने के लिए जो न केवल मेरे ह्रदय के करीब है बल्कि परमेश्वर के साथ हुए हर मुठभेड़ों का रहस्य भी है। मैं उन सभों का भी धन्यवादी हूँ जिन्होंने पिछले ब्लॉग के विषय में मुझसे बात की और स्वर्गदूतों के विषय में और अधिक जानने के लिए अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। मैं जल्द ही इसके बारे में अधिक बात करूंगा क्योंकि मैं चाहता हूं कि हम सभी इस दायरे में प्रवेश करें और स्वर्गदूतों की सहायता रोज़ाना प्राप्त करें। लेकिन, आज मैं दुल्हन के दायरे के बारे में कुछ बाँटना चाहता हूं। ओह, इससे मीठा और बेहतर कुछ नहीं है। मैंने एक बार पूछा, “परमेश्वर, मैं आपका आमना-सामना एक दुल्हन के रूप में कैसे कर सकता हूं ? मैं दुल्हन के दायरे को कैसे अनुभव कर सकता हूँ ? उन्होंने कहा, “घनिष्टता द्वारा। यह आत्मसमर्पण का एक क्षेत्र है  जहां तुम अपनी सारी चिंता छोड़ देते हो और तुम्हारा उद्देश्य केवल मुझसे प्रेम करना और मेरी सेवाटहल करना होता है। इसमें एक कीमत चुकानी पढ़ती है मेरे पुत्र। यह सुनकर मेरा ह्रदय धन्यवाद से भर गया और मैंने कहा, “मुझे लगता है ये कीमत इसके लिए उपयुक्त है परमेश्वर”। सच बोलू तो इस समय तक तो मैं दुल्हन के इस दायरे को लेकर परिचित था। आज मैं हर किसी को यीशु के पीछे साहसपूर्वक जाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता हूं क्योंकि ये मुठभेड़ सभी के लिए हैं ।

दुल्हन का दायरा मेरे लिए और यहां तक कि परमेश्वर के लिए भी बहुत कीमती है क्योंकि वह अपनी दुल्हन के लिए वापस आ रहा है। हर एक दैविक मुठभेड़ जो मेरे साथ हुए वो इसलिए नहीं हुई कि मैंने वो परमेश्वर से मांगी थी , वरन मैं यीशु के लिए लालायित था। मैं अपने संपूर्ण ह्रदय से उससे प्रेम करता हूँ। मैं इस व्यक्ति के लिए लालायित था, जो मेरे जीवन में आया और जो कुछ मैंने कभी किया था ,जिन विषयो के बारे में मैं कभी खुले में भी बात नहीं कर सकता था, उसने मुझे उस हर बात के लिए क्षमा कर दिया। मेरे हृदय कि पुकार ये ही थी कि “हे परमेश्वर तू कौन है” ? “कौन है तू परमेश्वर , मैं तुझे जानना चाहता हूं”, अभी भी मेरे हृदय कि पुकार ये ही है। सब कुछ उसी में मिलता है। ज्ञान के छिपे हुए धन, स्वर्गदूतों से मुठभेड़, और स्वर्गीय सुख यीशु में ही पाए जाते हैं। मुझे याद है जब मैं प्रार्थना करता था तो बिजली की लहरें मुझमें और मुझसे बहती थी। एक पल यहाँ रुकते है। मैं क्या कर रहा होता था उन दिनों ? मेरी प्राथनाए कैसी दिखती थी ? मैं प्रार्थना के दौरान परमेश्वर की बाट जोहता था। हर मुठभेड़ जो मेरा प्रभु के साथ हुआ वो इस बाट जोहने के स्थान में हुआ। मैं उसकी उपस्थिति में कुछ पल शांत ठहरता था। कभी-कभी मुझको प्रेम की जल धाराओं की तरह अनुभव होता था, जो बस बहती और बहती चली जाए, और जब आप ऐसे अनुभव के बीच में हो तो मेरी बात मानें, आप कभी भी इस अनुभव से बहार आना नहीं चाहोगे। 

इन दिनों में क्या कर रहा होता था ? मुझे तब बहुत कुछ पता नहीं था, इसलिए मैं बस अपनी प्रार्थना सूची पर प्रार्थना करने में समय बिताता और फिर कहता , “परमेश्वर, मैंने प्रार्थना कर ली है, अब मैं चुप रहकर आपके आने कि प्रतीक्षा करूँगा। मैं आपसे मुठभेड़ करना चाहता हूं”। शांत बैठना और इंतजार करना इतना कठिन था क्योंकि शरीर को ये पसंद नहीं है, और मन बेचैन हो जाता है। मुझे लगा कि मैं कुछ नहीं कर रहा हूं और केवल चुपचाप बैठकर अपना समय बर्बाद कर रहा हूं। यह महीनों तक चला, जब तक कि मुठभेड़ों का यह नया दायरा खुल नहीं गया। तभी से यह मेरे लिए एक आनंद का कारण बन गया है। प्रार्थना काम नहीं है, लेकिन मेरे प्यारे मित्रों ये एक आनंद है। आप केवल विश्राम में प्रवेश करने के लिए परिश्रम करते हैं और फिर आप आत्मा में उड़ान भरते है। पवित्र आत्मा आपको यीशु के पास ले जायेंगे क्योंकि वो प्रभु यीशु से सच में प्रेम करते है। यह प्रेम संसार के प्रेम से बिलकुल अलग है मेरे मित्रों। जब तक आपने सबसे बड़े प्रेमी से प्रेम करना नहीं सीखा, तब तक आप कभी  भी प्यार करना नहीं सीख सकते। जब तक आप सबसे बड़े प्रेमी से प्रेम प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक आप कभी प्यार नहीं दे सकते। परमेश्वर प्रेम है। जब आप उसे जानने और उसे प्यार करने की इच्छा के साथ शुरुआत करते हैं, तो वह आपको सिखाएगा और आपको सही समय के लिए तैयार करेगा। उस पर अपना स्नेह उडेलो प्रिय मित्रों। और जब वह आपकी ओर मुड़कर कहे, “अरे, मैं भी तुमसे प्यार करता हूं”, तो यह प्रेम आपको पूरी रीति से पिघाल देगा, तोड़ देगा, और आपको बदल देगा। उसकी आवाज़ आपके लिए सबसे कीमती भेंट है जो आप कभी भी पा सकते हैं। सृष्टिकर्ता कि वाणी जो हमारे भीतर से हमसे बात करती है, हमारे लिए सबसे उत्तम भेंट है। यह एक धीमी आवाज़ है जिसे एलिय्याह ने सुना ,जिसे आपको भी ध्यान से सुनने कि आवश्यकता है। यह हमेशा हवा या आग नहीं है। यही कारण है कि आज परमेश्वर की हमारे लिए ये ही पुकार है , “अगर मेरे लोग केवल मेरी सुनें”। वह इस ब्लॉग के पढ़ने वाले हर व्यक्ति से बात करना चाहता है। वह आपसे बहुत प्यार करता है।

वह जीवित वचन है जो स्वर्ग से आया है। उसका वचन लें, उसका वचन खोलें, और सुने वो आपसे क्या कहना चाहता है। तब तक पढ़ते रहिये जब तक आप जान ना जाए कि परमेश्वर ने आपसे बात की है। परमेश्वर ने जो भी कहा उसे सुनने के लिए तत्पर रहें, तो वो आपको और अधिक देगा।

मेरे मित्रों, यह परमेश्वर की आवाज़ थी जिसने मुझे अंधेरे, खालीपन और अकेलेपन की दुनिया से बाहर निकला। मैंने सब कुछ करने की कोशिश की ताकि मुझे प्यार मिल सके लेकिन अनैतिकता मुझे मिली। उसकी आवाज हीं है जिसने मेरे लिए सब कुछ बदल दिया। उसकी वाणी के लिए हमे लालायित रहना है। यही कारण है कि जैसा कि मैंने पहले कहा था, आज हमारे लिए उसकी ये ही पुकार है, “अगर मेरे लोग केवल मेरी सुनें।” (भजन संहिता – 81:13)

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याद रखें, परमेश्वर आपसे प्रेम करते है ,मैं भी आपसे प्रेम करता हूँ ,परमेश्वर इस ब्लॉग को पढ़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आशीष दे।

#lifeofencounters

Stanley Thomas

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