
“यदि परमेश्वर ने मुझे पहले ही चंगा कर दिया है, तो मैं इसे क्यों नहीं देख रहा हूँ? यदि उसके पीठ की मार ने मुझे पहले ही ठीक कर दिया है, तो मैं अभी भी दर्द में क्यों हूँ?” हमारा विश्वास अक्सर इस तरह के सवालों से घिर जाता है, और हमें हार मानने का मन करता है। कई बार, हम मान जाते है। आज, मैं एक छोटा सा अनुभव शेयर करना चाहता हूँ जो एक सुबह जागते समय हुआ था। जब से मैंने इसे सुना है मैं इसे आपसे बाटने के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकता।

अभी कुछ दिन पहले, जागते समय, मैंने सुना, “जितना करीब तुम मेरे लहू के हो, उतना ही करीब तुम मेरे चंगाई के हो। क्योंकि नई वाचा मेरे लहू में है, और मैं इस वाचा को कभी नहीं तोड़ूंगा”। तब मैंने खुद से कहा, “इसलिए जो कोई यीशु के लहू के जितना निकट होगा, वह अपने छुटकारे, शांति और परमेश्वर की सामर्थ में चलने के उतना ही निकट होगा”। लेकिन फिर मेरे पास एक सवाल था, और मैंने पूछा, “प्रभु, हम आपके लहू के निकट कैसे हो सकते हैं”? उन्होंने कहा, “जब तुम मेरे शरीर और लहू का भाग बनोगे। जैसे ही तुम अपने मुंह से अंगीकार करते हो, अपने दिल में विश्वास करते हो, और प्रभु भोज लेते हो, क्रूस पर पूरे किये कार्य की शक्ति तुम में प्रकट होती है और, शीघ्र ही तुम्हारे द्वारा भी। मनन किया करो इस सत्य पर मेरे संतान, कि मेरे लहू ने तुम्हारे लिए क्या किया है, और इसकी चर्चा करो, तभी तुम मेरे लहू के निकट आओगे”।

तो अब हमें क्या करना चाहिए? प्रकाशितवाक्य 1:6 कहता है कि तुम राजा और याजक हो! इसका मतलब है, याजक के रूप में, परमेश्वर पहले से ही हमसे अपेक्षा करते हैं कि हम अपने घरों में याजको का कर्तव्य पूरा करें। याजक के रूप में, हमें लगातार हर दिन प्रभु भोज में भाग लेना चाहिए। जितना अधिक हम ऐसा करते हैं, हम प्रभु के शरीर और लहू के करीब होते हैं। अब आप जानते हैं कि जब हम उसके लहू के करीब होंगे तो क्या होगा, है ना?

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