छुटकारे का जीवन जीने का रहस्य

पिछले हफ्ते मैंने परमेश्वर की उपस्थिति का अनुभव करने के लिए 3 आसान तरीके आपको बताये। यदि आपने मेरा पिछला ब्लॉग नहीं पढ़ा हो तो मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि इसे पढ़े और आशीषित हो। मैंने छुटकारे का जीवन जीने के लिए एक छोटा सा रहस्य बताकर ब्लॉग को समाप्त कर दिया था। मैंने लिखा, “आत्मा के दायरे में कुछ दुष्टता के प्रभाव हमारे जीवन में परमेश्वर की इच्छा का विरोध करते हैं। प्रार्थना में निरंतरता एक जयवंत जीवन जीने की कुंजी है। जब हम प्रार्थना में लगातार बने रहते हैं परमेश्वर के स्वर्गदूत इन दुष्टता के प्रभावों को रोक कर रखते है और रुकावटें दूर होने लगती हैं और फिर रहती ही नहीं। जब हम एक निश्चित क्षेत्र में छुटकारे के लिए प्रार्थना करते हैं तो उसमे बने रहना ही कुंजी है क्योंकि यह एक अनदेखा शत्रु है जो हमें रोक रहा है या बाधा डाल रहा है और परमेश्वर ने पहले ही अपने स्वर्गदूतों को इस छुटकारे को जो हम चाहते हैं हमारे लिए भेज दिए हैं ”।

हम इसे दानिय्येल 9: 21-23 में अच्छी तरह से सीख सकते हैं, जो कहता है, 21 तब वह पुरुष जिब्राइल जिसे मैंने उस समय देखा जब मैंने पहला दर्शन पाया,उसने वेग से उड़ने की आज्ञा पाकर सांझ के अन्नबलि के समय मुझको छू लिया 22 उसने मुझसे कहा हे दानिय्येल मैं तुझे बुद्धि और प्रवीणता देने को अभी निकल आया हूँ 23 जब तू गिड़गिड़ाकर बिनती करने लगा तब ही इसकी आज्ञा निकली इसलिए मैं तुझे बताने आया हूँ क्योंकि तू अति प्रिय ठहरा है ।

आप देखिए, जैसे ही दानिय्येल ने प्रार्थना करना शुरू किया स्वर्ग से उत्तर भेजा गया और जवाब जिब्राइल के हाथों भेजा गया। हम दानिय्येल 10: 12-13 पढ़ते हैं, “दानिय्येल मत डर। पहले ही दिन को जब तूने समझ – बुझने को मन लगाया और अपने परमेश्वर के सामने अपने को दीन किया उसी दिन तेरे वचन सुने गए और मैं उसी के कारण आया हूँ।13 फारस के राजा का प्रधान इक्कीस दिन तक मेरा सामना करता रहा परन्तु मीकाएल जो मुख्या प्रधानों में से है वह मेरी सहायता के लिए आया इसलिए मैं फारस के राजा के साथ रहा।
क्या आपने कुछ देखा? फिर से यह कहता है कि पहले दिन दानिय्येल की प्रार्थना का जवाब भेजा गया था लेकिन इसका विरोध किया जा रहा था। सफलता कैसे मिली? जैसे ही दानिय्येल ने स्वयं को समर्पित किया उन दुष्टता के प्रभावों को रोका गया और तब सफलता प्राप्त हुई ।

क्या होता अगर दानिय्येल 20वे दिन रुक जाता? कई बार हम उसी तरह प्रार्थना करते हैं और प्रार्थना में बने रहने की कोशिश करते हैं। हम इस पर कार्य करने की कोशिश करते रहते हैं और थक जातें है। हम कहते हैं “आज से परमेश्वर मैं प्रार्थना करूंगा और हर दिन कम से कम एक घंटे के लिए बाइबल पढ़ूंगा।” क्या आप जानते हैं कि अगले दिन से क्या होता है? हम परमेश्वर से अपने वादे को निभाने की कोशिश करते हैं। हम कड़ी मेहनत करते हैं और और खुद को उस हद तक थका देते हैं ,जब हम प्रार्थना करने को एक काम बना देते हैं और एक दिन रुक जातें हैं।
हम इन समयों में इतनी ढील नहीं दिखा सकते। अगर ऐसा कुछ है जो हमारे आसपास के लोग चाहते हैं तो यह परमेश्वर की सामर्थ है। यही कारण है कि परमेश्वर की सामर्थ में चलना और लोगों के जीवन में इसे प्रवाहित करने में सक्षम होना इतना महत्वपूर्ण है। पौलुस 1 कुरंथियो 4:20 में लिखता है परन्तु परमेश्वर का राज्य बातों में नहीं परन्तु सामर्थ में है।

प्रार्थना आपको थका देने के लिए एक काम नहीं है। इसका आनंद लेना है। प्रार्थना परमेश्वर के साथ समय बिताना है और आनंद की बात है। अब से मैं चाहता हूं कि हम सभी प्रार्थना को नए सिरे से समझे। आज मै आपके साथ अपने प्रार्थना के दृष्टिकोण बांटना चाहता हूँ क्योंकि बहुत से लोग मुझसे ये प्रश्न करते हैं कि मैं प्रार्थना में परमेश्वर के साथ समय किस प्रकार बिताता हूँ।

आज मै आपके साथ अपने प्रार्थना के दृष्टिकोण को बांटना चाहता हूँ क्योंकि बहुत से लोग मुझसे ये प्रश्न करते हैं की प्रार्थना में परमेश्वर के साथ समय किस प्रकार बिताएँ। अगले 21 दिनों के लिए मैं चाहता हूं कि आप सभी मेरे साथ ऐसा करें।

1. हर दिन 5-7 मिनट लें। जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि छुटकारा इसमें नहीं है कि कितना समय परमेश्वर के साथ बिताया बल्कि इसमें है कि प्रार्थना में हम प्रतिदिन बने रहे। अपने दिनचर्या से हटकर,समय कि कमी के बावजूद 5-7 मिनट प्रार्थना में बिताएं। प्रार्थना कैसे करनी चाहिए

2. परमेश्वर को जीवन के लिए धन्यवाद के साथ शुरू करें। उसके अशरतीय प्रेम के लिए धन्यवाद करें। धन्यवाद हमारे हृदयों को परमेश्वर से ग्रहण करने के लिए खोलता है। इसमें जल्दी मत करो। इसे धीरे से ले लो। प्रार्थना परमेश्वर से केवल बात करना नहीं है बल्कि प्रार्थना परमेश्वर से सुनने का विषय है कि वह क्या कह रहा है।

3. आपके भीतर परमेश्वर की उपस्थिति का एहसास करे करें और उसकी आराधना करना शुरू करें। कहें “परमेश्वर मैं आपको अपना सब ध्यान, अपना शरीर और अपना प्राण देता हूं”। अपने हृदय को परमेश्वर को अर्पित करें और उसे निहारें। कहें “हे परमेश्वर आप सुंदर, महिमामय , अद्भुत हैं। मेरे राजा मुझे आपसे प्रेम है”। आराधना हमें ऊँचे स्थान पर ले जाती है। ऐसा कहने से मेरा क्या मतलब है? हमेशा याद रखें प्रार्थना एक आत्मिक विषय है। आत्मा के दायरे में जो हो रहा है उसमें बहुत सामर्थ है। जब हम प्रार्थना में बने होते है हम आत्मा के दायरे में होने वाली गतिविधियों को समझना शुरू करते हैं। और ये तब होता है जब हम परमेश्वर कि वाणी को सुनना शुरू करते हैं।

4. जैसा कि जब आप परमेश्वर से प्रेम करते हैं उसकी आराधना करते हैं, अपने विचारों और उन चित्रों पर ध्यान दें जो आप अपनी कल्पना में देखते हैं। यदि आप कुछ विचारों के साथ संघर्ष करते हैं जो कि अस्वाभाविक हैं तो उनके साथ युद्ध न लड़ें। बस अपना ध्यान यीशु पर दें। जिस पल आपके पास एक अनजानी सोच या व्यर्थ कल्पना आये, याद रखें कि शैतान आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता है। कई बार हम इस साधारण सी बात को महसूस करने में असफल हो जाते हैं और युद्ध शुरू कर देते हैं। नहीं ! आप शैतान से नहीं लड़ते। यह आपका परमेश्वर के प्रति समर्पण है जो दुष्ट को रोकता है । परमेश्वर ने आपके लिए लड़ने के लिए अपने शक्तिशाली स्वर्गदूतों को भेजा है। आपको बस इतना कहना है कि “परमेश्वर एक बार फिर से मै अपना ध्यान आपकी ओर लगता हूँ ओर आपकी आराधना करता हूँ “। उसे अपनी कल्पना में देखें, उसे अपने साथ देखें।

5. अंत में, मेरी सलाह यह होगी कि आप एक नोटबुक रखें। प्रार्थना के समय में आपको वो बातें याद आएँगी जिन्हे हो सकता है आप भूल गए हों। उन विचारों का विरोध न करें लेकिन उन्हें अपनी नोटबुक में नोट करते रहें।

तो पहले 5 मिनट के लिए आप परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं, उसकी उपस्थिति के एहसास में आते है और उसकी आराधना करते हैं। जब आप आराधना करते हैं तो छुटकारे के उन क्षेत्रों को अपने हृदय में देखते रहे जिसके लिए आप प्रार्थना कर रहे हैं। यदि आप अन्यभाषा में प्रार्थना करते है तो अपने मन में आराधना करते हुए ज़रूर करते रहे। जल्दी में मत लगे रहना। अगले 2 मिनट में प्रार्थना के 5 मिनट के दौरान जो कुछ हुआ उस पर अपने विचार और छोटे बिंदु लिखें।

प्रिय दोस्तों मैं फिर से उसी बात पर जोर देता हूं। कुंजी इसमें नहीं है कि आपने परमेश्वर के साथ कितना समय बिताया बल्कि इसमें है कि आप लगातार परमेश्वर के साथ बने रहे। कृपया केवल परमेश्वर से आपके लिए कुछ चीजें करने के लिए कहकर अपनी प्रार्थना के समय को सीमित न करें। इसके बजाय थोड़ा ऊपर उठो। कैसे? वह जो है उसके लिए उसे प्रेम करो। जब आप उससे प्रेम करते है तो शांत रहो उससे बातें करो। थोड़े समय ऐसे ही बने रहने का प्रयास करें ओर उसको आपके साथ बात करने दें। जो परमेश्वर आपसे बोलते हैं उनको लिखने के लिए एक पेन ओर नोटबुक तैयार रखे। अगर आपको लगता है कि वह आपसे बात नहीं करेगा तो वह नहीं करेगा। विश्वास परमेश्वर को प्रसन्न करता है। आपकी कलम और नोटबुक मायने रखती है। यह दर्शाता है कि आप परमेश्वर से सुनने के लिए तैयार हैं।
मैं एक भविष्यद्वाणी के समाज को बढ़ाने और सभी के लिए परमेश्वर से सुनने को सरल बनाने की इच्छा रखता हूं। मैं आने वाले दिनों में “परमेश्वर से सुनने” पर लिखूंगा।

कृपया अपने प्रशनों के साथ मुझ तक पहुँचाने के लिए स्वतंत्र महसूस करें। मैं आपके लिए प्रार्थना करने और परमेश्वर की कही गई बातों को बाँटने के लिए आनंदित हूँ। साथ ही यदि आप इस ब्लॉग से आशीषित हुए हैं तो मैं आपका धन्यवादी रहूँगा यदि आप इसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर शेयर करें। आप मेरे साथ इंस्टाग्राम, फेसबुक पर जुड़ सकते हैं और अपनी गवाही मुझसे बाँट सकते हैं। मैं आपसे सुनना पसंद करूँगा। इन सब ब्लॉग को अपने मेल में प्राप्त करने के लिए साइन अप करना न भूलें। याद रखें, परमेश्वर आपसे प्रेम करते है ,मैं भी आपसे प्रेम करता हूँ।
परमेश्वर इस ब्लॉग को पढ़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आशीष दे।

#lifeofencounters

Stanley Thomas

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