आज से परमेश्वर की वाणी को सुनने की सीरीज़ का पहला भाग शुरू करेंगे। मेरा लक्ष्य सभी के लिए परमेश्वर की वाणी को पहचानना बहुत ही सरल बनाना है। याद रखें, यही कारण है कि यीशु पृथ्वी पर आया था। वह पिता के साथ हमारे सम्बन्ध को पुनर्स्थापित करने के लिए आया था। मेरी प्रार्थना है कि ये ब्लॉग न केवल परमेश्वर की वाणी सुनने में आपकी मदद करें , बल्कि उसकी वाणी आपको भीतर से बदलना शुरू करे ।
जरुरी नहीं है की हम भी औरो की तरह परमेश्वर को सुन पाए। क्योंकि हम सब उसकी दृष्टि में अनोखे है। तो यह महसूस करना शुरू करें कि आपका जन्म स्वर्गीय पिता की वाणी सुनने के लिए हुआ हैं। एक समय था जब हम उसे सुन नहीं सकते थे क्योंकि हम उससे अलग थे। यीशु ने न केवल उस अलगाव को दूर किया बल्कि पिता के साथ हमारे संबंध को पुनर्स्थापित किया। जैसे एक माँ अपने बच्चे को अपनी बाहों में लिए रखती है ,ऐसे ही हमारे स्वर्गीय पिता ने हमको अपनी बाँहों में लिया हुआ है। हम उसके प्यार भरे स्पर्श को महसूस करने के लिए रचे गए थे । उन्हें अपने बच्चों से बात करना बहुत पसंद है। परमेश्वर हमसे इसलिए बात करना पसंद करता है क्योंकि वो हमे सिखाना चाहता है और हमे अपने बेटे-बेटियों के रूप में बढ़ाना चाहता है। क्यों ? हमारे स्वर्गीय पिता का प्रतिनिधि बनने और उस कार्य को प्रकट करने में सक्षम होने के लिए जैसा कि यीशु ने पृथ्वी पर किया था। प्रभु की वाणी सुनना उस पर विश्वास के साथ शुरू होता है। यदि आप यह नहीं मानते कि परमेश्वर आपसे बात करना पसंद करते है, तो उसे सुनना असंभव हो जाएगा। इससे पहले कि मैं आपको परमेश्वर की आवाज सुनने के 3 आसान तरीके दूं, मैं चाहता हूं कि हम कुछ करें।
पहले , कहिये, “पिता, मैं आपको यीशु के नाम में धन्यवाद देता हूं कि आपको मुझसे बात करना पसंद है। मुझे विश्वास है कि आप मुझसे बात करना पसंद करते हैं क्योंकि मैं आपका बेटा / बेटी हूं।”
अब, याद रखें, यह पवित्र आत्मा है जो पिता की वाणी को हम तक पहुंचाता है। पवित्र आत्मा एक व्यक्ति है। वह आपका सबसे अच्छा दोस्त बन सकता है । मैं चाहूंगा की आप बेनी हिन द्वारा लिखित “वेलकम होली स्पिरिट / सुप्रभात पवित्र आत्मा” ज़रूर पढ़े। मुझे इस पुस्तक से बहुत आशीष मिली है।
अब हम पवित्र आत्मा से बात करना शुरू करते हैं क्योंकि वह आपका सबसे अच्छा दोस्त है। ओह, मैं समझा नहीं सकता कि वह आपसे बात करने के लिए कितना उत्साहित है। अब उससे अपने मन में बोलना शुरू करें। अपनी आँखें बंद करो और कहो, “हैलो पवित्र आत्मा, आप कैसे हो”?
तुमने क्या सुना ? क्या आपने सिर्फ “हैलो, मैं ठीक हूँ, तुम कैसे हो” सुना ? बधाई हो!! विश्वास कीजिये, वह आपसे बात कर रहा है।
अब, कहो “पवित्र आत्मा, आप अभी क्या सोच रहे हो”?
तुमने क्या सुना ? क्या आपने अभी सुना, “मैं आपके बारे में सोच रहा हूँ”? या और कुछ भी हो सकता है। यह एक विचार होता है। आप उसे अपने विचारों में बात करते हैं और वह उसी तरह आपको उत्तर देता है। संदेह करना बंद करो और अभी से विश्वास करना शुरू करो। आपको पता है, बिना विश्वास के परमेश्वर को खुश करना असंभव है। अपने विचारों में संदेह को न आने दें, जैसे “यह तो बस मैं ही था”, “ओह, यह सिर्फ मैं अपने आप से बात कर रहा था”। मेरे प्यारे मित्रों जिन्हें मैं अपने पूरे दिल से प्यार करता हूं, संदेह करना बंद करें! हमे एहसास होना चाहिए कि हमारा स्वर्गीय पिता इस सम्बन्ध के लिए, हमसे नियमित रूप से बात करने के लिए और हमे सिखाने के लिए कितना लालायित है ।
अटकलें लगाना बंद करें और विश्वास करना प्रारम्भ करें।
यही से हम सभी शुरुआत करते हैं, यहीं से मैंने भी आरम्भ किया केवल विश्वास के साथ ! और मैंने लगातार सम्पूर्ण हृदय से ये विश्वास करना आरम्भ किया कि परमेश्वर को मुझसे बात करना पसंद है।
परमेश्वर की वाणी सुनने के प्राथमिक तरीकों में से एक माध्यम हमारे विचार है। यह विचारों का एक बहाव है। परमेश्वर कि वाणी सुनने के ३ आसान तरीके मैं आपको बताना चाहता हूँ । मैं चाहता हूं कि आप अगले 7 दिनों के लिए इन निर्देशों का पालन करें, जब तक मैं परमेश्वर की वाणी सुनने की सीरीज़ पर अपना अगला ब्लॉग पोस्ट नहीं करता। यह एक काम नहीं है, लेकिन हमारे पिता से सुनने के लिए एक खुशी का कारण है। यदि आप अगले 7 दिनों के लिए ऐसा करते हैं, तो आप ध्यान देंगे कि आप उसकी वाणी के प्रति कितने संवेदनशील हो जाएंगे और आपको यह पसंद आएगा। कृपया अब एक नोटबुक और एक पेन तैयार रखें, चलो एक साथ ये अभ्यास करते हैं!
परमेश्वर की आवाज सुनने के तीन आसान तरीके-
1. विश्वास करो वह आप में है और उसे अपना ध्यान दें- उसे अपने विचार दें और उसे अपनाएँ। जैसे-जैसे आप उसकी आराधना करेंगे, आपका मन शांत होने लगेगा। ( इस चरण में आप अन्य भाषा या शब्दों में प्रार्थना कर सकते हैं ) ।
2. अपनी नोटबुक लें, और लिखें कि आप परमेश्वर से क्या पूछना चाहते हैं – लिखो, “हे पिता, आप मेरे बारे में क्या सोचते हो ? मैं जानना चाहता हूँ”। एक बार जब आप इसे लिखते हैं, तो मैं चाहता हूं कि आप अपनी आँखें बंद करें और कहें, ” धन्यवाद परमेश्वर, जैसे ही मैं लिखूंगा आप मुझसे बात करेंगे “।
3. अपने विचारों को लिखना शुरू करें- सोचना बंद मत करो। लिखते रहो। याद रखें ,यह विचारों का बहाव है; यह एक नदी है जो बहती है। इसलिए विचारों का बहाव समाप्त होने तक लिखते रहें, और फिर रुक जाएं।
इसे टू-वे जर्नलिंग के रूप में जाना जाता है। आप उससे सवाल पूछते हैं और विश्वास के द्वारा उत्तर मिलना शुरू होता है। हां, परमेश्वर की वाणी सुनने के कई तरीके हैं लेकिन आज से इसकी शुरुआत करें। एक सप्ताह तक ऐसा करना जारी रखें और देखें कि आपका जीवन कैसे बदल जाएगा। आप जो लिखते हैं, उसे पढ़ें। आप आश्चर्यचकित हो जाओगे। कठिन सवाल पूछने से डरो मत। हमारे पिता हमारे सवालों से डरते नहीं हैं; वह हमसे बात करना पसंद करते है।
इन ब्लॉगों के साथ मेरा लक्ष्य एक भविष्यद्वाणी के समाज को बढ़ाना है जो न केवल खुद के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी परमेश्वर को सुनें। मैं परमेश्वर कि वाणी को सुनना सभी के लिए आनंद का कारण बनाना चाहता हूँ। कृपया मुझे अपने सवालो, या संदेहों को भेजने में स्वतंत्र महसूस करें। मुझे उत्तर देना अच्छा लगेगा।
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