मै आज “भविष्यवाणी में बढ़ना” की श्रंखला को ही जारी रखना चाहता हूँ और आपको “आत्मा में देखना” के विषय में सिखाना चाहूंगा। मुझे बहुत अच्छे से याद है कि जब लोग कहते थे कि ओह, मैंने इसे प्रार्थना करते हुए देखा था, या मैंने आपके लिए ये देखा और मैं वहाँ खड़े हुए ऐसे महसूस करता था कि यार मेरी आंखों में कुछ गड़बड़ है क्योंकि हर कोई देख सकता है, बस मैं नहीं। तब मैं यह नहीं जानता था कि प्रभु मेरे भीतर आत्मा में देखने के लिए एक गहरी भूख पैदा कर रहे थे क्योंकि मैं इसके लिए पैदा हुआ था। क्या आपने कभी यह महसूस किया है? हाँ? आप इसके लिए बनाए गए हैं। ये भेंट आप में है। आज, यह ब्लॉग को पढ़ने से पहले ही ये भेंट आपके सामने प्रकट हो जाएगा।
हाल ही में मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ बाइक ट्रिप पर गया था और ट्रिप के बीच में हम एक प्रिय भाई से मिले जो अपने परिवार के साथ उस जगह पर घूमने आये थे। हम उस भाई को एक खूबसूरत हिल स्टेशन की छोटी यात्रा के लिए साथ ले गए। एक छोटे से ब्रेक के दौरान, उस भाई ने बताया कि कैसे उन्होंने इसी जगह पर मेरे एक दोस्त के साथ चाय पीने का सपना देखा था। पर उसे इस स्थान पर पहुंच कर, चाय पीते हुए ये सब याद आया। जैसे ही मैंने उसे यह कहते हुए सुना, मुझे लगभग तुरंत ही पता चल गया कि वह एक दर्शी है और वो भाई नहीं जानता कि वह एक भविष्यद्वक्ता है। मैं आपको ये नहीं समझा सकता कि मुझे यह कैसे पता चला। इसको सबसे अच्छे से मैं बस इस तरह से बता सकता हूँ – मैं बस उस पल में जान गया था यह बात मेरे भीतर। मैं उसे एक तरफ ले गया और उससे बात की। मैं जानता था कि वह आत्मा में देख सकता है लेकिन वह यह भी नहीं जानता था। मेरा ध्यान एक नीचे पड़े लाल मिर्च की ओर गया जहां हम खड़े थे और बात कर रहे थे।
मैंने कहा, “नीचे देखो, ध्यान से देखो, तुम्हें क्या दिख रहा है”?
उन्होंने कहा, “मुझे मिर्च जो लाल रंग की और सूखी है दिखाई दे रही है”… “यह पिस गयी है क्यूंकि ..”
मैंने उसे बीच में रोका, “नहीं, मुझको समझाओ मत, बस मुझे बताओ कि तुम्हे क्या दिखाई दे रहा है”
हैरानी से उसने ध्यान से देखना शुरू किया और कहा, “सूखी है, मैं देख सकता हूँ कि बनावट मुरझा गई है, मुझे जड़ में ओर रंग दिखाई दे रहे हैं…”
मैंने उस भाई से कहा – “किसी भी चीज़ को देखते हुए जब आप ये बताना शुरू करते हैं कि आप क्या महसूस कर रहे हैं या आपको क्या लग रहा है तो आप उसका अनुवाद करने लगते है, इसी को सुनना कहतें हैं”।
मेरा एक दोस्त पास खड़ा था और मैंने कहा, “अब, उसे ध्यान से देखो, और देखते रहो”। अब उसकी जानने की इच्छा बढ़ चुकी थी। उसे कुछ पता नहीं था कि क्या हो रहा है। मैंने फिर कहा, “अब मुझे बताओ कि जब तुम उसे देख रहे हो तो तुम्हें क्या लगता है”। मेरे ऐसा कहने पर आपको हैरानी होगी लेकिन उस भाई ने मेरे सामने खड़े मेरे दोस्त के बारे में कुछ ज्ञान के वचन एकदम सही बताये। मैं क्या कर रहा था? बस उसे अपने भीतर पहले से मौजूद परमेश्वर की दी हुई भेंट के बारे में जागरूक करने की कोशिश कर रहा था।
अब आप सब के लिए इस ब्लॉग को ओर सरल बनाने के लिए मै इस अनुभव को कुछ हिस्सों में बांटता हूँ –
जब मैं यह ब्लॉग लिख रहा हूं, मुझे अपने लैपटॉप के अलावा कुछ चीजें दिखाई देती हैं, उनमें से मुझे रिमोट दिखाई दे रहा है। अब मैं उस रिमोट को ध्यान से देखते हुए आपको वह सब बताऊंगा जो मैं देखता हूं-
मुझे एक सफेद रिमोट दिखाई देता है, यह बहुत पुराना नहीं लगता, यह थोड़ा धूल भरा है। इसके ऊपर का प्लास्टिक रैप फट रहा है। मुझे रिमोट पर अलग-अलग बटन और इधर-उधर कुछ खरोंच दिखाई दे रहे हैं। जब मैं और अधिक ध्यान से देखता हूं, मैं देख सकता हूँ कि खरोंच ने प्लास्टिक के कवर को कुछ जगहों से फाड़ा है, लेकिन अगर आपको शुरुआत में याद है, तो मैंने कहा कि यह बहुत पुराना नहीं दिखता है। अब यह मुझे थोड़ा पुराना लग रहा है। खैर, मैं इसी तरह जो कुछ मैं देखता हूं उसका वर्णन कर सकता हूँ।
ठीक इसी तरह ही तुम आत्मा में देखते हो। अपने चारों ओर देखो और किसी वस्तु पर अपना ध्यान केंद्रित करो और ध्यान से देखो और लिखो जो तुम देखते हो, ठीक वैसे ही जैसे मैंने अभी बताया है। 1 या 2 मिनट का समय लें और इसका अभ्यास करें अभी।
अब आंख बंद करके ऐसा ही किया करो। जब आप प्रार्थना में समय बिताते हैं तो कुछ समय के लिए शांत रहें और देखने की कोशिश करें। ध्यान दें। पहले तो तुम कहोगे कि मुझे काले अँधेरे के सिवा कुछ नहीं दिखता। अच्छा है! कम से कम कुछ तो दिखाई दिया! जैसे-जैसे आप देखते रहेंगे और इस तरह से इस अभ्यास में बने रहने का प्रयास करेंगे, आप और अधिक निपुण होते जाएंगे। अपने अनुभवों को लिखें क्योंकि वे आपकी बढ़ने की प्रक्रिया में आपकी सहायता करेंगे। मुझे आशा है कि मैंने इसे जितना हो सकता था मैंने उतना सरल बनाकर सही किया है। अगले ब्लॉग में, मैं सिखाऊंगा कि आप देखते समय कैसे सुन सकते हैं, या आप जो कुछ भी देख रहे हैं उसका अनुवाद कैसे कर सकते हैं। हम जो कुछ भी देखते हैं उसको व्यक्त करना “परमेश्वर से सुनना” कहलाता है। क्योंकि हम परमेश्वर की आवाज किसी भी रूप में सुन सकते हैं- कुछ देखकर, चित्र से, वीडियो जैसे दर्शन, विचार आदि से … पर आज बस मैं दर्शनीय दायरे कि बात कर रहा हूँ।
अंत में बस मैं यही कहूंगा कि कृपया इसका अभ्यास करें। जितना अधिक आप अभ्यास करेंगे और स्वयं को इससे जोड़े रखेंगे, आप उतने ही अधिक सक्षम बनेंगे। आनंदित रहे।
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