समय बदल रहा है और समय बदल गया है। यीशु के प्रति हमारा प्रेम और हमारी भक्ति केवल उस माप तक होगी जिस माप तक हम खुद को उसको समर्पित कर देंगे कि वह हमें अपने प्रेम से भरे और हमें पिता के प्रेम से तर दे। और जब हम यीशु के लिए इस अग्निमय प्रेम को लेकर चलते हैं तो लोग हमारे निपुण भाषण या प्रचार के कारण नहीं बल्कि केवल उस प्रेम के कारण बदलेंगे जो नदी के सामान हमारे भीतर है। सच्चा प्रेम क्या है, इसको स्थापित करने के लिए हम बुलाये गए है। हम पिता के प्रेम के द्वारा संस्कृतियों को रचने वाले और क्रोध और रोष के वातावरण को विफल करने के लिए बुलाये गए है।
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