एक दिन सुबह जागते समय मैंने सुना, “जो वर्ष टिड्डियों ने खाया है, मैं उसकी हानि तुम्हे लौटा दूंगा” (जोएल 2:25)। जब मैं इस पर विचार कर रहा था तो मैंने महसूस किया कि प्रभु ने कहा की, “मैं आपके अतीत में खोए हुए समय को पुन: स्थापित करूंगा, भविष्यद्वाणी के शब्द, भूले हुए वचन, अवसरों में अगर चूक हो गयी, बार-बार भविष्यवाणियाँ और प्रार्थनाआो के मिलने पर भी जीवन को लेकर लापरवाही, कई बार छुटकारे को ग्रहण करके भी फिर उन्ही आदतों में वापस जाना”, इन सब विषयों में मैंने यह महसूस किया की प्रभु एक लौटफेर लाने वाला है। अब, सबसे महत्वपूर्ण बात याद रखें। मैंने प्रभु की आवाज कैसे सुनी? मैं क्या कर रहा था? मैं सुबह उठ रहा था। अब से, जागते समय बिस्तर से बाहर निकलने की जल्दी न करना। अपने विचारों पर ध्यान दें क्योंकि जब हम जाग रहे होते हैं, तब आत्मिक दुनिया की गतिविधि बढ़े स्तर पर होती है। हम अपनी नींद से बाहर आ रहे हैं, जिसका अर्थ है कि हम आत्मा के दायरे से बाहर आ रहे हैं। इस समय के दौरान बहुत सी जानकारी जारी की जाती है और यह ध्यान देना हमारी महिमा है कि स्वर्ग से क्या जारी किया जा रहा है।
फिर बाद में उस दिन, जब मैं प्रार्थना के दौरान बाट जोह रहा था, मैंने अंतिम दिनों के बारे में एक सामर्थी दर्शन देखा। दर्शन में मैंने अपने पिता को अपने जवानी के दिनों के दौरान बिहार के एक लड़के को सुसमाचार सुनाते देखा जब वह बिज़नेस करते थे। कुछ वर्ष बाद मैंने देखा कि वही पुरुष अब शादीशुदा था और अमरीका में बस गया। वह मेरे पिता से मिलना चाहता था और एक दिन वह उनसे मिला। उसने उन्हें अपना नाम बताया और मेरे पिता उसकी गवाही सुनकर बहुत भावुक हो गए। दर्शन के अंत में मैंने अपने पिता को मेरे पास आते हुए देखा यह कहने के लिए कि उस आदमी की गवाही को सुनकर वह कितना भावुक और प्रभावित हुए। और वो कहने लगे की आँखें खोल दने वाली बात तो यह थी कि जिस पल उसने यीशु का नाम लिया, कोई भी अपने आसुओं को रोक न सका। और जब मैंने अपने पिता को यह कहते हुए सुना, वह भी रोने लगे और कहा, “बेटा, इन अंतिम दिनों में यीशु का प्रेम और यीशु के प्रति प्रेम इतना बढ़ जायेगा कि यीशु के नाम के ज़िक्र से ही लोग रोने लगेंगे”। और फिर मैं उस अनुभव से बाहर आ गया। यह इतना सामर्थी पल था क्योंकि उस घडी मैं खुद अपने ऊपर परमेश्वर की भारी उपस्थिति को लहरों के सामान महसूस कर सका।
मेरा मानना है कि यह सच है मेरे प्रियों, समय बदल रहा है और समय बदल गया है। यीशु के प्रति हमारा प्रेम और हमारी भक्ति केवल उस माप तक होगी जिस माप तक हम खुद को उसको समर्पित कर देंगे कि वह हमें अपने प्रेम से भरे और हमें पिता के प्रेम से तर दे। और जब हम यीशु के लिए इस अग्निमय प्रेम को लेकर चलते हैं तो लोग हमारे निपुण भाषण या प्रचार के कारण नहीं बल्कि केवल उस प्रेम के कारण बदलेंगे जो नदी के सामान हमारे भीतर है। सच्चा प्रेम क्या है, इसको स्थापित करने के लिए हम बुलाये गए है। हम पिता के प्रेम के द्वारा संस्कृतियों को रचने वाले और क्रोध और रोष के वातावरण को विफल करने के लिए बुलाये गए है।
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