परमेश्वर के संतान के रूप में चलने का अर्थ क्या है?

कुछ साल पहले मैं अक्सर एक शब्द पर विचार करता था और सोचता था कि “पुत्रत्व” है क्या ? मैं पवित्र आत्मा को जानने लगा और उन्होंने मेरी यीशु को जानने में सहायता की। मुझे यीशु से प्यार हो गया। मैं उसे जानने लगा लेकिन पिता को नहीं। मैं सोचता था कि जब मैं सही चीजें करता हूं तो वह मेरे पास आता है और जब मैं गलत काम करता हूं तो वह मुझसे दूर हो जाता है। ऐसा ही कुछ हमें सिखाया जाता है और ऐसा ही कुछ हम अभी भी कुछ बच्चों को पढ़ाते हैं कि “ऐसा मत करो, परमेश्वर आपसे नाराज होंगे” या उन्हें यह बताकर कि जब वे अच्छा व्यवहार करते हैं तो यीशु उनसे प्यार करता है। इससे सारा ध्यान हमेशा “मुझ पर“, “मैं क्या करता हूँ“, “मैं क्या कर रहा हूं” और “मैं कैसे कर रहा हूं” पर केंद्रित होता है। एक अच्छा छात्र, एक अच्छा पासबाँ, एक अच्छा शिक्षक, एक अच्छा पति, एक अच्छा विश्वासी, एक अच्छा बेटा या एक बेटी बनने की कोशिश करने की प्रक्रिया मेरे दोस्तों हमें दबाव में रखती है। लेकिन पिता के गोदी में एक छोटा बालक होना ? यह सुख को दर्शाता है। परमेश्वर के संतान होने की वास्तविकता में जब हम सुख से रह सकते हैं तो दबाव में क्यों जीएं ? क्योंकि पिता कहते हैं कि तुम मेरे बेटे हो, जिससे मैं प्रेम करता हूं। तुमसे मैं अति प्रसन्न हूं।

आज इसे हमारा मूल मूल्य बनने दो कि मैं उसका पुत्र हूं। जिस पल यह हमारी वास्तविकता बन जाती है हम दूसरों को इस वास्तविकता से देखना शुरू करते हैं कि हमारा पिता कितना अच्छा है और मैं कितना प्रेम किया गया हूँ और हम चाहने लगते हैं कि हर कोई यह जानना चाहे कि पिता कितना अच्छा है और वह सब कितना प्रेम किये गए है। जब मैं इस वास्तविकता में जीता हूँ तो हमेशा सब कुछ आसान नहीं होता। मैं गलतियां करता हूं और कई बार थक जाता हूं लेकिन फिर जैसे ही एहसास करता हूँ कि मेरा पिता कितना भला हैं और मैं कितना प्रेम किया गया हूँ, सब कुछ बदल जाता है।

अनाथ दुनिया इस बात पर आधारित है कि “जब मैं कुछ करूँगा”, “फिर मेरे पास होगा” और “फिर मैं कुछ बन जाऊंगा”। लेकिन परमेश्वर के पुत्र और पुत्रियों लिए यह कि “मैं एक बेटा हूं”, और “जिसके कारन मेरे पास सब कुछ है” और उस वास्तविकता के कारण “मैं सब कुछ कर सकता हूँ”। परमेश्वर के राज्य कि परिभाषा आप क्या करते हैं इससे नहीं है वरन इसमें है कि आप है कौन । परमेश्वर का राज्य आपके द्वारा किए जाने वाले चँगाईयो की संख्या या आश्चर्यकर्मो के बारे में नहीं है वरन इसके बारे में कि आप है कौन। पुत्रत्व इस सच्चाई से जीना है कि मैं मसीह यीशु में परमेश्वर की धार्मिकता हूं और उसी में मुझे प्रभु की शांति और आनंद प्राप्त है जो मेरी ताकत है। यह हमारे मनों में एक अनाथ होने का झूठ है जो स्वीकृति, मान्यता और प्रेम की तलाश करता है। लेकिन परमेश्वर का राज्य ऐसे काम नहीं करता है। जिससे पहले कि यीशु सेवा के लिए निकले पिता ने यह घोषणा की कि “यह मेरा बेटा है, जिसे मैं प्रेम करता हूँ। इससे मैं अति प्रसन्न हूं। यह परीक्षा लिखने से पहले ही 100 अंक प्राप्त करने के जैसा है। यदि आप इस वास्तविकता से नहीं जीते हैं तो आप गलत स्थानों पर प्रेम की तलाश करेंगे और यह हमें मुश्किल में डाल देगा।

स्वतंत्रता ही के लिए मसीह ने हमें स्वतंत्र किया है। आत्म-परीक्षण से मुक्त, आत्म-प्रयासों से, वास्तव में आज़ाद। अनुग्रह हमें स्वतंत्र रूप से चलने का अधिकार देता है। इस एहसास में चलना कि आप कौन हैं और आप किसके हैं, आपके प्रति पिता का आनंद और आपके शब्दों की समर्थ जो आपके और उसके मिलन से बहती है – सच्चा पुत्रत्व यही है


सच्चा पुत्रत्व पिता के हृदय को दर्शाता है और पृथ्वी पर उसे पूर्ण रूप से प्रकट करने में सक्षम है

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Stanley Thomas

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