जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा

जिससे पहले कि हम आज के ब्लॉग में डुबकी लगाए, मैं आज आप सभी के साथ एक पद बाटना चाहूंगा जिससे आपको समझ आये आगे जो मैं आज आप सभी के साथ बाटूंगा। याकूब 1: 2-4 कहता है, ”जब आप कई तरह के परीक्षाओं का सामना करते हैं, तब मेरे भाइयों और बहनों, इसका शुद्ध आनंद समझिए क्योंकि आप जानते हैं कि आपके विश्वास का परखा जाना दृढ़ता पैदा करता है। दृढ़ता को अपना काम पूरा करने दें ताकि आप परिपक्व और पूर्ण हो सकें, किसी चीज की कमी न हो ”।

मैं अपने जीवन के मौसम के बारे में आप सभी के साथ वास्तविक होना चाहता हूं। जैसे ही मैं एक सपने को देखते हुए मैं सुबह उठा और इसका मतलब क्या था, इस बात पर विचार कर रहा था, तब मेरे मन में यह विचार आया, “मुझे लगता है कि मैं अब तक के सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में हूं और यह मुश्किल है। हे प्रभु, इसमें मेरी साहयता करें। इसमें मेरी सहायता करने के लिए आपने पहले ही अपने स्वर्गदूतों को सौंप दिया है। मैं उनकी मदद और सेवा ग्रहण करता हूँ। मेरी आँखें खुल जाएँ मैं प्रार्थना करता हूँ, आमीन।

मेरा दिल भारी था और मैं असहाय महसूस कर रहा था, और मैं इसके बाद प्रभु की उपस्थिति में बाट जोहने लगा (या मनन करने लगा अपने स्वपन के उत्तर की ओर)। इसके बाद एक अद्भुत अनुभव मिला जैसे बाट जोह रहा था। याद रखें, जब आप उसे पूरे दिल से खोजोगे, तो आप उसे पा लेंगे। मेरे प्यारे दोस्तों, वह शान्ति में पाया जाता है और वह आपको कभी निराश नहीं करेगा। उसकी वाणी इतनी कीमती है कि वो सब कुछ को बदल देता है। उसकी वाणी मेरे प्यारे दोस्तों, प्रेम से भरी और बहुत आश्वासन देने वाली है। मेरी प्रार्थना है की आज आपको उसकी वाणी से प्रेम हो जाए। हमारी और प्रभु की मित्रता से अधिक सुंदर और कीमती कुछ भी नहीं है। अब मैं चाहता हूं कि आप अपने कुर्सी की पेटी बाँध ले और तैयार हो जाए। क्या आप यह सुनने के लिए तैयार हैं कि हमारे जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा क्या है? मेरा विश्वास करो, इसे पढ़ने के बाद, आप समझेंगे कि यह हमारे जीवन के हर क्षेत्र पर लागू होता है।

जैसे मैं प्रभु की उपस्थिति में बाट जोह रहा था, तब मेरा ह्रदय एकदम शांत हो गया और उस सन्नाटे में मैंने सुना, “सबसे बड़ी परीक्षा आपकी क्षमता और अक्षमता में है कि आप जिस भी संकटकाल में हैं, उसके बीच में क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करते है या नहीं। यदि आप अपने आर्थिक जीवन में परखे जा रहे हैं तो फिर पास होने की परीक्षा आपके देने या निवेश करने में नहीं बल्कि आपकी क्षमता और अक्षमता में होती है की क्या आप अपने पिता का भरोसा कर सकते है की वो आपकी देखभाल और आपका प्राविधान कर सके। यदि आप रिश्तों के क्षेत्र में परखे जा रहा है तो यह सही या गलत व्यक्ति के बारे में नहीं है या आपके चुनाव पर भी निर्भर नहीं करता लेकिन परीक्षा आपके भविष्य को लेकर अपने पिता का भरोसा करने की आपकी क्षमता पर है की क्या आपको भरोसा है की वो आपके लिए प्रदान करेगा और आपको हरी चराइयों में ले चलेगा”। जैसे ही मैं इस अनुभव से बाहर आया, मैं प्रभु की प्रतिक्रिया पर दंग रह गया। मैं समझ गया कि प्रभु हमेशा ह्रदय ही को सबसे पहले देखता है, और फिर हमारे कार्यो पर ध्यान देता है। वह हमेशा ह्रदय को पहले देखता है मेरे प्यारे दोस्तों। आज आप चाहे किसी भी परिस्थिति में हों, चाहे जो भी परिस्थितियां हों, चाहे आप जिस भी संकट में हों, अपने नेतृत्व करने के लिए और आपको संभालने के लिए अपने स्वर्गीय पिता की देखभाल करने की क्षमता पर भरोसा करें। उसे उस विशेष क्षेत्र में आत्मा और प्राण के बीच एक अलगाव लाने की अनुमति दें ताकि आपके हृदय की आंखें सत्य के प्रति खुल जाए। इब्रानियों 4:12 कहता है कि “परमेश्वर का वचन (बोला गया वचन या इसे आसान बनाने के लिए, उसकी वाणी) जीवित और शक्तिशाली है। यह किसी भी दोधारी तलवार से तेज है। उनका शब्द हमारी आत्माओं और प्राण और हमारे जोड़ों और गूदे को अलग करता है, और यह तब तक होगा जब तक यह वचन हमारे दिलों की इच्छाओं और विचारों को पता करके स्पष्ट नहीं करता है।” इसलिए समय निकालें और उससे सुनें। वचन पढ़ें और ध्यान दें, जैसे ही कुछ भी हाइलाइट किया गया हो, उसे बोलें और उसके बारे में सोचना आरम्भ करें। डूब जाओ परमेश्वर की वाणी की ओर। वह आपका ख्याल रखेगा। उस पर भरोसा करो।

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Stanley Thomas

2 thoughts on “जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा”

  1. विश्वास का परखा जाना दृढ़ता पैदा करता है। दृढ़ता को अपना काम पूरा करने दें ताकि आप परिपक्व और पूर्ण हो सकें, किसी चीज की कमी न हो ”।

    जब परिस्थितियां मेरे विपरीत हो जाती तब मेरा विश्वास कमजोर पड़ जाता है | मुझे ये ब्लॉग पढ़कर लगा की परमेश्वर मेरे विश्वास को और बढ़ाना चाहता है और द्रढ़ करना चाहता है ताकि मैं और परिपक्व और पूर्ण हो सकूं |

    Thank you bhaiya !

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