सर्वसामर्थी बनने का रहस्य

आज के ब्लॉग को शुरू करने से पहले मैं आपके साथ हमारी पहचान, बुलाहट और उद्देश्य के विषय में कुछ विचारों को बांटना चाहता हूँ।

पहचान – जन्म से पहले ही हमे एक पहचान मिली है ,और ये पहचान वो है जो परमेश्वर हमारे बारे में सोचते हैं। हमारी पहचान परमेश्वर की छवि और उनकी समानता में है।

बुलाहट – हमारे जन्म से भी पहले परमेश्वर ने हमें बड़े – बड़े कार्य करने के लिए बुलाया है। इस सामर्थी बुलाहट को पूरा करने में हमें सक्षम बनाने के लिए परमेश्वर ने हमारे अंदर कुछ भेंटो को डाला है कि उसकी बुलाहट पूरी हो सके। ये बुलाहट और इस बुलाहट को पूरा करने के लिए भेंट हमेशा हमारे पास रहेंगे।

उद्देश्य – जैसे ही हम अपनी बुलाहट को समझ जाते हैं और पहचान जातें हैं, उसको पूरा करना ही इस पृथ्वी में हमारा उद्देश्य बन जाता है।

हमारी पहचान और उद्देश्य के प्रति हमारी जागरूकता ही हमे सामर्थी बनाती है, लेकिन सबसे अधिक सामर्थी नहीं। तो बाइबिल के अनुसार सबसे अधिक सामर्थी कौन था? यूहन्ना – बपतिस्मा देने वाला।

तो कुछ ऐसा हुआ – मैं मरकुस 1 पढ़ रहा था। जब मैं इसे पढ़ रहा था तो पढ़ते समय मुझे वो पद याद आया जहाँ यीशु खुद ये गवाही देते हैं की स्त्रियों से जन्म लेने वालों में यूहन्ना से बड़ा और कोई नहीं है। तब मैंने परमेश्वर से पूछा यूहन्ना इतना सामर्थी कैसे था ये मंं जानना चाहता हूँ। तब मैंने सोचा शायद इसलिए क्योंकि वो टिढ़ियाँ और जंगली मधु खाता था — और टिढ़ियाँ वचन में नाश करने वाली वस्तु को दर्शाती हैं और यूहन्ना नाश करने वाली वास्तु को खाता था इसलिए वो सामर्थी था। फिर मैंने सोचा शायद वो साधारण कपडे पहनता था या साधारण जीवन जीता था इसलिए वो सामर्थी था। तब मेरा ध्यान उस ओर गया, जहां उस ने कहा, कि मेरे बाद एक आनेवाला है, जिसकी जूती का बंध भी मैं खोलने के योग्य नहीं। मैंने अपने मन में महसूस किया, “हाँ, नम्रता, पर कैसे”?

और मुझे लगा कि मैंने सुना, “क्योंकि तुम उनकी शक्ति, उनकी क्षमता को पहचानते हो, और तुम उन्हें खुद को व्यक्त करने और प्रकट करने के लिए रास्ता बनाते हो”। दूसरों में सामर्थ को पहचानना और दूसरों में ईश्वरीय महिमा को पहचानना ही नम्रता है और इसी बात ने यूहन्ना को सबसे सामर्थी बनाया।

यूहन्ना एक संदेशवाहक था जिसे यीशु के लिए मार्ग तैयार करने के लिए आगे भेजा गया था। इसी तरह, कलीसिया के पिता और अगुवे पूर्वज हैं। उन्हें अपने उन बच्चों को जिन्हे उन्होंने शिक्षित किया और शिष्यता की अवस्था में बढ़ाया है, उनके लिए मार्ग तैयार करने और बनाने के लिए अनुभव और ज्ञान के साथ आगे भेजा है।

महिलाओं से पैदा हुए लोगों में यूहन्ना से बड़ा कोई नहीं हुआ, फिर भी आप उससे अधिक शक्तिशाली बन सकते हैं, कैसे? सबसे छोटा बनकर और सबका सेवक बनकर।

मुझे लगता है कि अब जो सबसे बड़ा प्रकाशन कलीसियाओं में आ पहुंचा है, वह शरीर के संबंध में है। आपका शरीर, मेरा शरीर, हमारी मनुष्यता। मुझको हैरानी होती हैं ऑडियो बाइबल में सुसमाचार के पुस्तकों को सुनते हुए। उसमें आरम्भ में कुछ ऐसे होता है — मत्ती/मरकुस के अनुसार सुसमाचार … यही कारण है कि हर सुसमाचार में लिखी गयी घटनाएं अलग अलग रीति से दर्ज कि है। इसलिए नहीं कि वचन में कुछ गड़बड़ है, बल्कि इसलिए कि इसे मनुष्यों ने लिखा है। हम अलग अलग तरह से देखते हैं, हम अलग अलग तरह से खुद को व्यक्त करते हैं, जब कि हम सब एक हैं। लूका 3:23 में लूका एक असाधारण बात लिखता है। वो लिखता है (यीशु की बात करते हुए) वह पुत्र था, (जैसा समझा जाता था) युसूफ का। क्यों ऐसा लिखता है? क्यूंकि लूका कुछ ऐसा जानता था जो बहुत से यहूदी मानते नहीं थे। वह जानता था कि यीशु परमेश्वर कि और से जन्मा था और वह परमेश्वर का पुत्र था। वह जो चिरस्थायी है और जिसका कोई आकर नहीं है, उसने मानव रूप धारण किया और पृथ्वी पर चला आया। मिट्टी के बर्तन में अपनी महिमा प्रकट करना हमारे पिता की प्रसन्नता थी। परमेश्वर ने हम में प्राण फूंकने के लिए नीचे झुकना चुना। हमारे अंदर रहने के लिए उसने नीचे झुकना चुना। यही नम्रता है। एक मनुष्य की अवस्था में जो कुछ करना चाहिए था यीशु ने वह सब किया। उसकी नम्रता फिलिप्पियों 2:5 में प्रकट होती है जब उसने उन सभी गुणों को त्याग दिया जो प्रभु यीशु को परमेश्वर बनाता है और यीशु ने स्वयं को सामर्थ से खाली कर दिया। उसके पास केवल मानवीय सामर्थ थी और वह पूरी तरह से परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर था। इसी शरीर में वह प्रगट रूप से कुछ चेलों के सामने रूपांतरित हुआ। क्यों? क्यूंकि वो कह रहा था कि देखि यह तुम्हारे लिए भी संभव है, तुम भी कर सकते हो। यदि वास्तव में तुम परमेश्वर के द्वारा दिए गए शरीर के मूल्यों को समझते हो और यह भी कि ये वो वह स्थान है जहां परमेश्वर रहता है, तो तुम अपने शरीर की देखभाल करोगे।

हमेशा याद रखें कि आप और मैं अपनी सामर्थ में बहुत कुछ कर सकते हैं क्योंकि हम कर सकते हैं, लेकिन सबसे सामर्थी वही है जो दूसरों में क्षमता देख लेता है और उनके लिए रास्ता बना देता है।

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Stanley Thomas

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